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Faasile

195.00

फ़ासिले परविंदर शौख़ का ग़ज़ल-संग्रह है, जिसमें रिश्तों की नज़ाकत, मोहब्बत की गहराई, दर्द की कसक और जीवन की सच्चाइयों को बेहद असरदार अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है। इस किताब की ग़ज़लें इंसान के दिल में उठने वाले उन भावों को सामने लाती हैं, जहाँ कभी मोहब्बत की मुस्कान दिल को सुकून देती है तो कभी जुदाई और फ़ासले गहरा दर्द दे जाते हैं।
कवि ने बड़ी खूबसूरती से इंसानी रिश्तों की पेचीदगियों, मोहब्बत और नफ़रत की पतली रेखा, तथा जीवन के सफ़र की कठिन राहों को अपने अल्फ़ाज़ों में ढाला है। ग़ज़लों में इबादत जैसी पाकीज़गी भी है और टूटे हुए एहसासों का दर्द भी। कहीं यह मोहब्बत को जीवन का सहारा बताती हैं तो कहीं जुदाई और तन्हाई के असर को सामने रखती हैं।
कुल मिलाकर, फ़ासिले ऐसी किताब है जो दिल की गहराइयों तक उतर जाती है और पाठक को अपने ही अनुभवों और रिश्तों से जोड़कर सोचने पर मजबूर कर देती है।

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